भारत वर्ष में पथरी का रोग सबसे आम रोगों में से एक है. किंतु यदि इस रोग का उपचार समय से ना किया जाए तो रोगी को अत्यंत पीड़ा झेलनी पड़ती है. अँग्रेज़ी उपचार में सर्जरी के माध्यम से पथरी को बाहर निकाल लिया जाता है. जबकि आयुर्वेदिक उपचार में कुछ आयुषधियों के माध्यम से पथरी धीरे धीरे पिघल कर शरीर से बाहर निकल जाती है.

आइए जानते हैं किन उपायों से पथरी से छुटकारा पाया जा सकता है -

  • प्रतिदिन 3 से 4 ताज़ा नारियल का पानी अवश्य पिएं.
  • दिन में 2 बार मूली का रस काला नमक मिला कर लें.
  • अर्जुन छाल का चूर्ण 2 ग्राम ( आधा चम्मच) पानी में उबाल कर छान कर सुबह शाम लें.
  • पाषण भेद की जड़ पंसारी से ले आएँ. इसको धूप में सूखा कर पीस लें. इसका एक चम्मच चूर्ण को पानी में उबाल कर सुबह शाम छान कर लें.
  • रसदार फलों का एवं पानी का सेवन अधिक करें. गरिष्ठ भोजन से दूरी बनाए रखें. एक से तीन माह के उपचार से पथरी पूरी तरह घुल कर शरीर से बाहर निकल जाती है. किसी चमत्कारी आयुषधि के चक्कर में ना पड़ें जो 2 या 3 दिन में पथरी निकाल देने के दावे के साथ आती हों. पथरी का जमाव जिस प्रकार धीरे धीरे होता है. उसी प्रकार धीरे धीरे ही यह पिघल कर बाहर निकलेगी. पथरी निकालने का सबसे सुरक्षित यही उपाय है.

सावधानी - अर्जुन छाल लेने से घबराहट महसूस हो तो मात्रा आधी कर दें. थोड़ा गुड मिला कर सेवन करें. ज़मीन से निकला पानी ना पिएं. जैसे कुआँ बोरवैल आदि.

वैद्य जी vaidya ji



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